🌟 बधाई हो श्रुति नागवंशी! 🌟
बनारस की बेटी श्रुति नागवंशी एक सच्ची नारी शक्ति की मिसाल हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी लगभग 30 वर्षों से बाल श्रम, बाल विवाह और महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष करने में समर्पित कर दी है।
छोटी उम्र से ही उन्होंने समाज के सबसे वंचित दलित महिलाओं और बच्चियों के साथ काम किया, उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने, अस्पताल सुविधाएँ दिलाने और उनके अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने में सहायता की। श्रुति ने लगभग 15 बाल विवाह को होने से रोका, कई बच्चियों को समय से पहले शादी के अँधेरे से बाहर निकाला और उनके जीवन को नई दिशा दी।
अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने PVCHR की शुरुआत की। इसी कार्य के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली और 2016 में भारत के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा टॉप 100 महिला अचीवर्स में शामिल किया गया।
हम श्रुति के साहस, सेवा, और समर्पण को सलाम करते हैं! 💐
और उन सभी महिलाओं के लिए भी जो अपने समुदाय के लिए बदलाव लाने की दिशा में मेहनत कर रही हैं।
📌 Her Circle एक डिजिटल मंच है, जिसे नीता एम. अंबानी ने स्थापित किया है – महिलाओं को अपनी कहानियाँ, अनुभव और विचार साझा करने के लिए एक सुरक्षित, सहयोगात्मक और प्रेरणादायक स्थान देने के उद्देश्य से।
🔗 पूरी कहानी पढ़ें:
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🌟 Congratulations Shruti Nagvanshi! 🌟
Shruti Nagvanshi from Banaras is a true example of women’s strength. For over 30 years, she has dedicated her life to fighting against child labor, child marriage, and violence towards women.
From a young age, Shruti worked alongside marginalized Dalit women and girls — helping them access government schemes, healthcare facilities and boldly raising her voice for their rights. She has prevented around 15 child marriages, saving young girls from being forced into adulthood too soon, and has given them a new lease on life.
Together with her husband, Shruti founded the PVCHR and her work has been recognized internationally. In 2016, she was honored among the Top 100 Women Achievers by India’s Ministry of Women and Child Development.
We salute her courage, dedication, and lifetime of service! 💐
And we celebrate all women working to uplift and empower their communities.
📌 Her Circle is a digital platform started by Nita M. Ambani, created to give women a safe, collaborative, and inspiring space to share their stories, thoughts, and experiences.
बाल विवाह एक प्रथा नहीं, बल्कि गंभीर परिणाम है, जो कि लड़कियों से उनका बचपन और हौसला छीन लेता है और इसी के खिलाफ आवाज उठाने का सराहनीय कार्य वाराणसी की श्रुति नागवंशी कई सालों से कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि कम उम्र से ही श्रुति ने महिलाओं के उत्थान के लिए खुद को समर्पित कर दिया है। ज्ञात हो कि बीते 30 सालों से दलित महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने बाल श्रम और महिलाओं को दिए जाने वाले सभी तरह के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बुलंद की है। श्रुति का कहना है कि महिलाओं से जुड़े उत्पीड़न के मामले छोटे या बड़े नहीं होते हैं, बल्कि पीड़ादायक होता है। आइए जानते हैं विस्तार से।
बनारस निवासी श्रुति नागवंशी ने कई दलित महिलाओं को नई जिंदगी दी है। उन्होंने कई साल पहले बाल श्रम को लेकर एक लड़ाई शुरू की और उसमें सफल भी रही और उसके बाद से ही लगातार उन्होंने बाल श्रम से लेकर बाल विवाह की जड़ को खत्म करने का कार्य किया है। उन्होंने लगभग 15 बाल विवाह को होने से रोका है। कई सारी छोटी लड़कियों के जीवन को वक्त से पहले शादी के अंधेरे से बाहर लाने का कार्य किया है। अपने पति के साथ मिलकर उन्होंने मानवाधिकार जन सतर्कता समिति की शुरुआत की। इसके साथ ही अपने सराहनीय कार्य के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिल चुकी है। साल 2016 में उन्हें भारत के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शीर्ष 100 महिला अचीवर्स में भी शामिल किया गया। उन्हें लेनिन रघुवंशी के साथ मिलकर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया जा चुका है। हालांकि बीते दो दशक से अपने इस कार्य को शुरू करने की प्रेरणा उन्हें बचपन में ही मिल चुकी है। वह कई सामाजिक कार्यों का हिस्सा बचपन से ही रही हैं। अपने करियर और जीवन में कई तरह की चुनौतियों के बाद भी उन्होंने लोगों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों को हमेशा जारी रखा और अपना जीवन पूर्ण तरह से समर्पित कर दिया है। समाज के लिए अपनी इस सेवा पर श्रुति का कहना है कि उन्होंने तकरीबन 30 साल पहले इस काम को शुरू किया था और फिर मानवाधिकार जन निगरानी समिति के द्वारा बाल श्रम की लड़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि उनके अब तक के सफर में उन महिलाओं के सामने अपने अधिकारों के लिए बड़ा संकट था, जो खासतौर पर बस्तियों में रहती थीं। खासतौर पर इन महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना और अस्पताल जैसी सुविधा के लिए वह लगातार प्रयास कर रही हैं और सफल भी रही हैं।
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