Tuesday, July 03, 2018

Neo-Dalit consultation for elimination of corporate fascism based on caste system, patriarchy, communal fascism and neoliberal economy at Kabirchaura Math, Varanasi, India


Neo-Dalit consultation for elimination of corporate fascism based on caste system, patriarchy, communal fascism and neoliberal economy at Kabirchaura Math, Varanasi, India

Sir and Madam,

Greetings from City of pluralism, diversity and inclusiveness: Varanasi in India.

Varanasi, one of the oldest and continuously inhabited cities in the world is known also as Banaras or Kashi and incorporates the different schools of thoughts, religions which makes it the centre of attraction among people across the globe.

India is a land of diversity with great and long History populated by many different peoples, from many different origins, and who have many different religious, political and philosophical views. Many abuses are committed against peoples due to their caste or their religion and nature is more and more systematically ransack for privates interests.

The mains problems facing the country came from two things: the implementation of a "culture of impunity based on mind of caste with silence " - which is a sharing believe that few can act without be accountable for their actions – at the social, economic and political level, and the meet of this cognitive problem with a context of market democracy and economic globalisation.


After that, we will take time to propose a way to change this situation by calling for the creation of a "neo-Dalit" movement – combining shudras and anti-shudras from all regions. We will also try to explain why this popular movement seems to be the best way to remove this "culture of impunity" and how opinion leaders from all communities have a great role to play on this major gathering.

We believe that many problems that India faces today are linked together and therefore cannot be separated, both in understanding and resolution. For that reason, we believe that the most effective way to resolve them is to address the problem in a comprehensive approach that takes into account the political, economic and sociological and seeks solutions which take care of those different "linked problems", based on a popular movement.

This shall help to put an end to corporate fascism arising out of casteism, sectarian thinking, neoliberal economic policy and communal fascism.

Therefore in this context, Neo Dalit Consultation has been called upon on occasion of Quit India Movement, August 09, 2018 at the Moolgadi Kabirchaura Math,Kabirchaura, Varanasi,India at 11 am.  It is one step after Banaras Convention further for better India for better world.

You are cordially invited as a distinguished guest for the programme as an ambassador of sustainable peace with justice in world.


Yours truly

Front Page Publication (London, UK), PVCHR, Asha, Media Vigil Trust, United against hate, Satvika, Gaon ke log, United Citizen Forum, Sangram, Jeevan Jyoti Society and Ashok mission educational society
              Neo Dalit Consultation coordination committee
                      pvchr.india@gmail.com










Note:

This initiative is not being financially supported by any corporate.  So, interested key speakers and people looking forward for their active participation are requested to borne their expense of travel and accommodation. 

We are inviting you to be the part of this initiative through being sponsors and donors. The bank details are as follows:

Name of bank
UCO bank
Address of Bank
Pandeypur, Varanasi, U.P India
Bank account number
Foreign contribution
20110100001170
National Contribution
20110100000768
Bank account name/beneficiary
Jan Mitra Nyas
SWIFT No:
UCBAINBB106 (mention please transfer to account no. 1170, UCO Bank Pandeypur, Varanasi)
IFSC No.
UCBA0002011
Address of Bank
Pandeypur, Varanasi, U.P India



प्रिय सम्मानित साथी,

        वाराणसी, जो बनारस या काशी के नाम से भी मशहूर है यह दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है | जो 11 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से काशी एक आध्यात्मिक सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी जानी जाती है | विभिन्न धर्मावलम्बियों के विचारों का केंद्र होने, अपनी साँझा संस्कृति गंगा जमुनी तहजीब और बहुलतावादी संस्कृति के साथ ही साथ यह अपने पवित्र गंगा घाट के कारण दुनिया में लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना है |

        जहाँ एक तरफ पुरातन समय से हर धर्म और जाति में समुदायों के बीच में आपस में एक दूरी बनाई गयी है जिसकी वजह से इनमे कभी समन्वय स्थापित नहीं हो पाता है | इसलिए काशी से "नव-दलित" आंदोलन का आगाज़ करने हेतु एक बेहतरीन मंच बन सकता है जिसके माध्यम से हम आपसी एकता और एकजुटता को बढ़ावा दे सकते है |

        9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की गयी थी इसी ऐतिहासिक दिन के उपलक्ष्य में वाराणसी के मूलगादी कबीरचौरा मठ में 9 अगस्त 2018 को नव दलित सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जो एक बेहतर भारत और बेहतर दुनिया के लिए बनारस सम्मेलन के बाद यह एक कदम आगे बढ़ने जा रहा है।

सभी 'टूटे हुए लोगों' औरप्रगतिशील लोगोंकी एकता दण्डहीनता की संस्कृति वंचितिकरण के खिलाफ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि कि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगाजो इस प्रणाली से लाभ उठाते हैं | इसलिएसंरचनात्मक परिवर्तन केवल सामाजिक पिरामिड के नीचे से ही आना चाहिए | इस आंदोलन को 'नवदलितकहने का तात्पर्य यह है कि भारत में दलित समुदाय ही है, जो सबसे ज्यादा पीड़ित है और दलित आन्दोलन दुनिया का सबसे उत्कृष्ट अहिंसात्मक परिणामदायी आन्दोलन रहा है |
नवदलित आंदोलनको करने का उद्देश्य राजनीतिकआर्थिक और सामाजिक स्थितियों में न्याय समता के परिप्रेक्ष्य में बदलाव लाना प्रमुख है | सबसे पहलेहम कानूनी प्रक्रिया द्वारा राजनीतिक दमन और दण्डहीनता के खिलाफ लड़ सकते हैं | कई मानवाधिकार संगठन पहले से ही 'कानून के गलत नियमों का सम्मान करने वाले ब्राह्मणवादी सोच (पुरोहितवादी सोच) को चुनौती देते हुए सरकार से न्याय पर आधारित कानून के राज को स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं | वही दूसरी ओर हमें संज्ञानात्मक कमजोरी को बदलकर सामाजिक दण्ड को हराना होगाक्योकि जातिवादी संग्यनात्मकता ने लोगों को अपनी हीन भावना का शिकार बनाया है औरचुप्पी की संस्कृतिको बढ़ावा दिया है | आज हमें नव दलितों के लिए एक आम मंच बनाने की जरूरत है जिससे यह चुप्पी की संस्कृति की दीवार तोड़ी जा सकेजो यथास्थिति के प्रति स्वीकार्यता की राह प्रशस्त करता है | ऐसे में हमें इस आन्दोलन को आगे बढ़ाने के लिए संवाद की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए जो उन्हें सिखाएगी कि संवैधानिक रूप से हम सभी समान हैं |
नवदलित आंदोलन वंशजातिधर्म और लिंग पर आधारित भेदभाव का सामना करने वाले सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए उम्मीदसम्मान और मानवीय गरिमा का प्रतीक है | दण्डहीनता चुप्पी की संस्कृति के खिलाफ न्याय, क्षमा याचना न्याय पर आधारित नेल्सन मंडेला के संघर्ष का माडल है |  जाति व्यवस्थासामंतवादसांप्रदायिक फासीवाद और नवउदारवाद के खिलाफ विभिन्न समुदायों में एकता लाने के लिए एक पहल है | यह भविष्य में दुनिया में बहुलवादी लोकतंत्र सभी को तरक्की में योगदान करने की उम्मीद पैदा करता है।
        आपको न्याय के साथ सतत शांति के राजदूत बनने के लिए एक विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित करता हूं | ताकि सांप्रदायिक सोच और सांप्रदायिक फासीवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष में हम आपके समृद्ध अनुभव से लाभान्वित हो सकें |
हम आपको विशेष अतिथि के रूप में भी आमंत्रित कर रहे हैं | कृपया pvchr.india@gmail.com पर अपनी भागीदारी की पुष्टि कर सकते है |

स्थान  : मूलगादी कबीर चौरा मठ, पिपलानी कटरा के पास, कबीर चौरा, वाराणसी |
दिनांक : 9 अगस्त, 2018
समय  : 11 बजे सुबह

भवदीय
नव दलित विमर्श समन्वयन समिति :
मानवाधिकार जननिगरानी समिति, फ्रंट लाइन पब्लिकेशन (लन्दन), यूनाईटेड अगेंस्ट हेट, सात्विक, मीडिया विजिल ट्रस्ट, अशोक मिशन एजुकेशनल सोसाईटी, गाँव के लोग, आशा, सावित्री बा फूले महिला पंचायत, बुनकर दस्तकार अधिकार मंच, यूनाईटेड सिटिज़न फोरम  
संपर्क – 9935599333









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